PragyaanBrahm1

निर्विवादितः अनेक कारणों से आज विश्व सर्वनाश के कगार पर खड़ा है। भयंकर विश्व-समर की समस्याएँ एवं विभीषिकाएँ प्रतिपल प्राणों को भयविकंपित कर रही हैं। इस दु:स्थिति का सर्वोपरि कारण है- विश्व के धारक एवं पालक धर्म के प्रति हमारा विकट उपेक्षा-भाव तथा पारम्परिक भारतीय संस्कृति एवं सदाचार में हमारी उत्तरोत्तर उन्नीततर हो रही अनास्था।


प्रत्येक प्राणी सुखांक्षी है और सुख भी ऐसा जो सतत् मिले, सर्वदा मिले, जिसके लिए श्रमशील न होना पड़े। जो पराधीन न हो एवं जिसका अविरत मान होता रहे। उच्चकोटिक महत्वकांक्षा होने पर भी यह एक विचित्र बात देखने में आती है कि उसकी सम्प्राप्ति के साधन के सम्बन्ध में सब एकमत नहीं हैं।

 

 

First Edition : 2015
Price : Rs. 400
ISBN : 978-93-84767-24-2
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